नासा का एक सैटेलाइट जिसका नाम वैन एलन प्रोब ए था, 10 मार्च को क्रेश हो गया,
इस सैटेलाइट का वजन 600 किलोग्राम था जिसको 2034 तक अंतरिक्ष में रहना था,
लेकिन सूरज की विकिरणों से प्रभावित होकर यह अचानक कल रात को ही क्रैश हो गया,
क्या है वैन एलन प्रोब ए
यह एक नासा का वैज्ञानिक मिशन था, जिसको 30 अगस्त 2012 को लांच किया गया था,
इसका यह ‘वैन एलन प्रोब ए’ नाम अमेरिका के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी जेम्स ए वैन एलन के नाम पर रखा गया था,
वे अमेरिका के प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक थे, उन्होंने ही पृथ्वी के चारों तरफ घूमने वाले रेडिएशन बेल्ट्स का पता 1958 में लगाया था,
इसलिए नासा ने इस मिशन का नाम उनके सम्मान में जेम्स ए वैन एलन के नाम पर रखा,
इसका उद्देश्य क्या था
वैन एलन प्रोब ए का उद्देश्य पृथ्वी के चारों ओर रेडिएशन वेल्ट्स का पता लगाना था,
असल में वैज्ञानिकों का यही मकसद था कि, यह पता लगाया जा सके की पृथ्वी के चारों ओर रेडिएशन किस तरह बनते और बदलते हैं,
इसका ईंधन 2019 में खत्म हो गया था लेकिन इसे 2034 में पृथ्वी की कक्षा में आकर सुरक्षित रूप से नष्ट होना था,
किंतु यह समय से पहले ही 10 मार्च 2026 को पृथ्वी की कक्षा में आकर क्रैश हो गया,
इससे कहां और क्या नुकसान होगा
वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी का 70% हिस्सा समुद्र से ढका हुआ है इसीलिए इसके पृथ्वी पर गिरने के चांस कम है,
हालांकि इसको 2034 में पूरी तरह से नष्ट होना था किंतु यह 8 साल पहले ही क्रैश हो गया है,
इसीलिए संभावना है कि, इसका थोड़ा-बहुत मालवा जैसे, फ्यूल टैंक आदि गिर सकता है, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं होगा,
हालांकि लॉन्चिंग के समय इसका वजन 600 किलोग्राम था,
लेकिन भौतिकी के नियम के अनुसार इसका वजन अभी उतना ही रहेगा,
हालांकि, संभावना है कि सूरज की किरणों से जलने और टूटके बिखरने के कारण इसका मालवा टुकड़ों में गिरेगा,
वैन एलन प्रोब बी का क्या होगा
नासा के दूसरे सैटेलाइट वैन एलन प्रोब बी के फिलहाल अभी गिरने की संभावना नहीं है,
लेकिन क्योंकि इसका पहला सैटेलाइट क्रश हो चुका है इसलिए वैज्ञानिकों और आम नागरिकों के प्रति इस घटना ने चिंता बढ़ा दी है,