बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी की जीत से भारत पर क्या होंगे असर
12 फरवरी यानी कल हुए बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने लगभग जीत हासिल कर ली है।
अब देखना यह बाकी है कि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सत्ता में आने पर भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध किस तरह अपने रिश्तों को आगे बढ़ाएंगे।
या ये रिश्ते और खटास की तरफ बढ़ते हुए नजर आएंगे।
इन्हीं बातों पर नजर डालने के लिए आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि,
यदि बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी की जीत हो जाती है, तो भारत के साथ उसके संबंध किस तरह आगे बढ़ेंगे और उन पर क्या असर होगा।
आम चुनाव 2026
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता पतन के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं, इन चुनावों की घोषणा बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एम नसीरुद्दीन ने 11 दिसंबर को की थी।
इसके तहत, 350 सदस्यीय बांग्लादेशी संसद, जिसको जातीय संसद कहा जाता है, में से 300 सीटों पर 12 फरवरी 2026 को चुनाव होने की घोषणा की गई थी।
जिसके चुनाव परिणाम 13 फरवरी तक आने की संभावना जताई गई और ऐसा हुआ भी।
जिसमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के बड़े बेटे तारीख रहमान की पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 212 सीटों पर लगभग जीत हासिल कर ली है।
बांग्लादेश की संसदीय प्रणाली
बांग्लादेश में एक सदनीय संसदीय व्यवस्था है, बांग्लादेश के इस सदन को जातीय संसद कहा जाता है।
बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सीटें हैं, जिसमें से 300 सीटों पर चुनाव हुए थे, इनमें से कल 151 सीटें जीतनी होती हैं।
किसी भी राजनीतिक दल अथवा उसके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए।
अतिरिक्त बची 50 सीटों पर निर्वाचित हुए सदस्यों द्वारा मतदान करके महिलाओं का निर्वाचन किया जाता है, क्योंकि वे सीट सिर्फ महिलाओं के लिए ही आरक्षित होती हैं।
बांग्लादेश में आम चुनाव और भारत
इमेज स्त्रोत: मुस्लिम लीग
वैसे तो जब-जब बांग्लादेश में आम चुनाव होते हैं, भारत की नजर बांग्लादेश के आम चुनाव पर होती है,
क्योंकि 2009 से 2022 तक जब भी आम चुनाव हुए हैं,
इन चुनावों में भारत को समर्थन देने वाली अवामी लीग की ही सरकार बनी है, और शेख हसीना का झुकाव भारत की तरफ रहा है।
लेकिन इस बार ना तो शेख हसीना और ना ही अवामी लीग इस चुनाव में भाग ले रही है, इसीलिए और भी ज्यादा भारत की नजरे बांग्लादेश के चुनाव पर गहराती हैं,
कि यदि बांग्लादेश में दिवंगत खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, जिसका नेतृत्व अब तरिक रहमान कर रहे हैं,
यदि सत्ता में आती है तो भारत के साथ उनके और उनके साथ भारत के कैसे संबंध होंगे।
भारत और बांग्लादेश का व्यापार
जब आवामी लीग सरकार में थी तब से भारत और बांग्लादेश के व्यापारिक संबंध बहुत मजबूत थे,
किंतु 2024 में अवामी लीग के पतन के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में खटास आने लगी।
इससे न सिर्फ राजनीतिक स्तर पर भारत और बांग्लादेश के संबंध बिगड़े बल्कि आर्थिक और व्यापारिक स्तर पर भी दोनों देशों के संबंधों में नर्मी और तर्क वितर्क होने लगा।
भारत बांग्लादेश से क्या-क्या खरीदा है
भारत बांग्लादेश से मुख्य रूप से कपास (जीन किया हुआ), जूट (कच्चा और धागा), मछली (विशेषकर हिल्सा), रेडीमेड कपड़े और चमड़े का सामान आयात करता है।
इसके अलावा, भारत वहां से वनस्पति तेल और कुछ रासायनिक उत्पाद भी खरीदता है।
इससे समझा जा सकता है कि, बांग्लादेश भारत के व्यावसायिक रिश्तों के लिए कितना महत्वपूर्ण है,
हालांकि बांग्लादेश भी इससे कई मामलों में भारत पर निर्भर रहा है।
बांग्लादेश भारत से क्या-क्या खरीदा है
बांग्लादेश अपनी अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भारत से कई महत्वपूर्ण चीज़ें खरीदता है।
प्रमुख निर्यात वस्तुएं
कपास और सूती धागा: यह बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग के लिए सबसे ज़रूरी कच्चा माल है।
खाद्यान्न: चावल, गेहूं, चीनी और ताज़ी सब्जियां (जैसे प्याज)।
ईंधन और बिजली: पेट्रोलियम उत्पाद और झारखंड के गोड्डा प्लांट जैसी परियोजनाओं से बड़ी मात्रा में बिजली।
मशीनरी और वाहन: औद्योगिक मशीनरी, ऑटोमोबाइल (दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन) और उनके स्पेयर पार्ट्स।
रसायन: दवाओं के निर्माण के लिए ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स और प्लास्टिक कच्चा माल।
लोहा और इस्पात: निर्माण कार्यों के लिए स्टील और एल्युमीनियम उत्पाद।
इससे देखा जा सकता है कि भारत से कहीं ज्यादा अधिक बांग्लादेश भारत पर निर्भर रहा है।
हालांकि जब से बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी सत्ता से गई है, तब से बांग्लादेश अपनेआप को और भी, ओपन पॉलिसी और ओपन रिलेशनशिप वाली अर्थव्यवस्था बनने की कोशिश कर रहा है।
भारत में शेख हसीना
जानकारी के लिए बता दें, बांग्लादेश में शेख हसीना के विघटन के बाद से शेख हसीना अभी भारत में राजनीतिक जीवन के रूप में अपना जीवन निर्वाचित कर रही हैं,
उन्हें दिल्ली के एक विशेष अतिथि गृह में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है।
और वे भारत के लिए एक सम्माननीय अतिथि और महत्वपूर्ण मेहमान हैं, हालांकि 2024 में विद्रोह फैलाने और सैकड़ो लोगों की हत्या करने के आरोप में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है।
स्रोत: बीबीसी न्यूज़ हिंदी
