13 मार्च का इतिहास (13 March ka itihaas)

आज 13 मार्च है, आज का दिन भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन ऊधम सिंह से जुड़ा हुआ है,

इसके अलावा और भी ऐसी कुछ घटित हुईं जिनको जानना और समझना जरूरी है,

तो आईए, जानते हैं कि कौन-कौन सी घटनाएं 13 मार्च के इतिहास में हुई थी,

जलियांवाला हत्याकांड का बदला 1940:

आज के ही दिन 1940 में उधम सिंह ने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला जनरल ओ डायर पर गोलियां चला कर लिया था,

इसके लिए वे पहले लंदन गए, और वहां पर जनरल ओ डायर पर तड़ातड़़ गोलियां बरसा दीं,

जानकारी हो कि, 1919 में जलियांवाला बाग में एक शांति सभा के दौरान पंजाब के तत्कालीन सेना अधिकारी ने अचानक गोलियां चलवा दी थीं,

इस घटना में 1000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे, हालांकि तत्कालीन सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग ही मारे गए थे,

रूस की जासूसी करते पकड़े गए ब्रिटेन के पांच नागरिक 1961:

13 मार्च 1961 को ब्रिटेन की 2 महीना और तीन पुरुष अधिकारी रूस के लिए जासूसी करते हुए पकड़े गए,

उन पर आरोप लगाया कि ये देश के आंतरिक सुराग रूस को भेज रहे थे,

ये ब्रिटेन की नौसेना की जानकारी तत्कालीन सोवियत संघ को भेजते थे जो अपने नाम बदलकर यहां रहते थे,

स्कॉटलैंड के एक स्कूल में गोलीबारी 1996:

स्कॉटलैंड के डनब्लेन स्कूल शहर के एक स्कूल में अचानक एक बंदूक धरी ने गोलियों की बौछार कर दी,

इस घटना में 16 बच्चे और उनके शिक्षक मारे गए थे,थॉमस हैमिल्टन नाम के शख्स ने बाद में अपने को भी गोली मार ली,

इससे ब्रिटेन की जनता के गुस्से का सामना सरकार को करना पड़ा और फिर हथियार के कानून को लेकर सरकार सख्त हुई,

इसके बाद ब्रिटेन में हथियार नियंत्रण कानून को सख्त किया गया और हेण्ड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया,

कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान में हंगामा 1996:

आईसीसी विश्व कप 1996 में भारत और श्रीलंका के सेमीफाइनल मुकाबले में हंगामा हो गया,

श्रीलंका की तरफ से 250 रनों के टारगेट के जवाब में 120 रन पर भारत के 8 विकेट गिर गए,

इससे 110000 की संख्या से खचाखच भरे स्टेडियम में अचानक उपद्रव फैल गया,

किसके कारण आईसीसी ने श्रीलंका को मुकाबले में विजयी कोशिश कर दिया,

हिंदी के प्रसिद्ध कवि आत्मा रंजन का जन्म 1971:

आज ही के दिन 1971 में हिंदी के प्रसिद्ध कवि आत्मा रंजन का जन्म मध्य प्रदेश के सागर में हुआ था,

उनकी प्रमुख रचना ‘हवा की मुट्ठी में’ है, जो अत्यंत प्राकृतिक भाषा में मानवीय चित्रण करते हुए लिखी गई है,

उन्होंने अपनी रचनाओं में आम आदमी के संघर्ष और सत्ता के प्रति प्रतिरोध को दर्शाया है, 

 

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