24 मार्च का इतिहास (24 March ka itihaas)

आज दिनांक 24 मार्च है और यह बर्फ का 83वां दिन है, तो चलिए जानते हैं आज के खास इतिहास के बारे में,

माइक्रो बैक्टीरिया ट्यूबरक्लोसिस की खोज 1882

आज ही के दिन 1882 में जर्मन के प्रसिद्ध डॉक्टर रॉबर्ट कोच ने इस बैक्टीरिया की खोज की थी जो टीवी का कारण बनता है,

यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से फेफड़ों में फैला है और रीड़ तक संक्रमण फैला देता है जो आगे चलकर घातक हो जाता है,

संक्रमित व्यक्ति के छींकने अथवा खांसने से हवा में फैलने वाले सूक्ष्म बैक्टीरिया के कारण यह वायरस फैलता है,

कई बार यह वायरस सुस्त अवस्था में रहता है, लेकिन इम्यूनिटी कमजोर होने के बाद यह सक्रिय हो जाता है,

मोरारजी देसाई भारत के प्रधानमंत्री बने 1977

24 मार्च का इतिहास (24 March ka itihaas)

आपातकाल के बाद हुए  चुनावों में इंदिरा गांधी की जबरदस्त हार के बाद मोरारजी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने,

1977 में हुए आम चावन के बाद पहली बार कोई गैर-कांग्रेसी भारत के प्रधानमंत्री की गाड़ी पर बैठा था,

वह भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत रत्न और निशान ए पाकिस्तान पुरस्कार प्राप्त किया है,

इससे पहले वे देश के वित्त मंत्री और गृहमंत्री तथा मुंबई प्रांत के मुख्यमंत्री भी रह चुके थे,

उनका छोटा कार्यकाल सिर्फ 2 साल तक ही चल पाया था और 1979 में उनकी सरकार गिर गई,

भूटान में नेशनल असेंबली का गठन 2008

भूटान में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव कराए जाने के बाद नेशनल असेंबली का गठन आज के दिन किया गया था,

इतिहास में पहली बार हुए संसदीय चुनाव में भूटान पीस एंड प्रोस्पेरिटी पार्टी ने 47 में से 45 सिम जीतीं,

जिग्मेथिनले भूटान के पहले लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बने, ये लोकतांत्रिक रूप से हुए चुनाव में जीतने वाले पहले प्रधानमंत्री थे,

इसी साल पहली बार भूटान में संविधान का निर्माण शुरू हुआ और उसे पूरा किया गया,

इसके बाद भूटान की सत्ता में राजा के अधिकारों को सीमित कर दिया गया और लोकतांत्रिक राजशाही लाई गई,

श्रीलंका से शांति सेवा वापस आई 1990

यह शांति सेवा श्रीलंका में चल रहे गृह युद्ध को रोकने तथा तमिल विद्रोहियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए गई थी,

लेकिन उनका सामना उन तमिल विद्रोहियों से ही हो गया जिसके लिए भारतीय सेवा गई थी जिसके कारण सेना को वापस आना पड़ा,

तत्कालीन श्रीलंका सरकार और स्थानीय लोगों ने ही भारतीय सेवा का विरोध करना शुरू कर दिया,

जिसके कारण भारत के प्रधानमंत्री बीपी सिंह के आदेश पर 24 मार्च 1990 तक भारतीय सेवा वापस आ गई।

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