CJP प्रदर्शन में मीडिया की भूमिका पर आपस में भिड़े पत्रकार

CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के चलो संसद के भारी विरोध प्रदर्शन में जमकर हंगामा और बवाल सामने आया।

इसमें कई प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से पीटा गया जिसके चलते कई छात्र घायल और गंभीर चोटों का शिकार हुए।

प्रदर्शन करने आए हजारों छात्रों में से सैकड़ो की तो बिखरी हुई चप्पल ही प्रदर्शन की भयावहता बताती हैं।

टीवी पत्रकार निशाने पर

सीजेपी प्रदर्शन में मीडिया की भूमिका पर आपस में भिड़े पत्रकार

जो प्रदर्शन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्तीफे से शुरू हुआ था, इस बीच टीवी पत्रकार भी विरोध प्रदर्शन की चपेट में आ गए।

दरअसल, प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे एक टीवी पत्रकार ने कुणाल कमरा की विवादित टिप्पणी पर बात करनी चाही।

इससे प्रदर्शनकारियों को लगा कि आंदोलन को अलग दिशा दी जा रही है, प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध करनाशरू किया।

इसके बाद टीवी पत्रकार भी उग्र हो गए, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें पुलिस का सहारा लेना पड़ा।

वरिष्ठ पत्रकार भी आपस में भिड़े

इसके बाद, वरिष्ठ पत्रकार विजेता सिंह और शेखर गुप्ता आमने-सामने आ गए जिन्होंने इस पर अपनी-अपनी दलील दी।

द हिंदू की एडिटर विजेता सिंह ने लिखा, टीवी पर नफरत फैलाने वाले एंकर और प्रेजेंटर के मुकाबले ग्राउंड रिपोर्टर अलग होते हैं। 

जो नफरत टीवी के एंकर फैलाते हैं, इसका खामियाजा ग्राउंड रिपोर्टर्स को भुगतना पड़ता है जो सही नहीं है। 

इससे पहले, पत्रकार पूनम पांडे ने भी विरोध प्रदर्शन में पत्रकारों के विरोध पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

उन्होंने कहा, मीडिया संस्थानों से गुस्सा हुआ जा सकता है लेकिन उसका बदला ग्राउंड रिपोर्टर से नहीं लेना चाहिए। 

ग्राउंड रिपोर्टर्स कड़ी धूप, बारिश और ठंड से लापरवाह होकर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं उनको ऐसे विरोध का सामना करना पड़ता है।

इसके बाद ही, पत्रकार विजेता सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी जिसके जवाब में शेखर गुप्ता ने उन पर पलटवार किया।

भीड़ पर नहीं छोड़ सकते सुरक्षा

शेखर गुप्ता ने कहा है पत्रकारों की सुरक्षा भीड़ पर नहीं छोड़ सकते

द प्रिंट के संस्थापक और द इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक शेखर गुप्ता ने विजेता सिंह की बात पर टिप्पणी करते हुए कहा।

भीड़ तो भीड़ होती है और किसी भी पत्रकार की सुरक्षा भीड़ पर नहीं छोड़ी जा सकती क्योंकि वो आक्रामक हो सकती है। 

एक पत्रकार किसी एक भीड़ के लिए अच्छा है तो वही अच्छा पत्रकार दूसरी भीड़ के लिए बुरा हो जाता है।

गुप्ता ने आगे कहा, पत्रकार वरिष्ठ हो या जूनियर भीड़ के नेरिटिव में कुछ नहीं पता चलता सब पिस जाते हैं।

तथाकथित हैं स्वतंत्र टीवी पत्रकार

सीनियर जर्नलिस्ट टेबलिन सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा।

मैंने पत्रकारिता को 50 साल दिए हैं, लेकिन मैं यह बोल सकती हूं कि, आज का कथित स्वतंत्र टीवी मीडिया शर्मनाक है।

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