Neet paper leak: मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जिसके चलते परीक्षार्थियों में गहरा आक्रोश उभरता जा रहा है,
दरअसल, नीट-यूजी पेपर लीक मामले में अब तक नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे से हुई एक गिरफ्तारी चौंका देने वाली है,
यहां से एक महिला प्रोफेसर मनीषा मांढरे को गिरफ्तार किया गया है, हैरानी की बात यह है कि यह महिला प्रोफेसर परीक्षा कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी के रूप में नामित की गई थी,
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी अर्थात, नीट की परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA ने इस महिला प्रोफेसर को एक्सपर्ट आब्जर्वर के रूप में नियुक्त कर रखा था,
लेकिन, जबकि नीट परीक्षा पेपर लीक के धीरे-धीरे मास्टरमाइंड सामने आते जा रहे हैं, इसीलिए सीबीआई ने भी अपने कदम मजबूत कर लिए हैं।
जिसके चलते इस महिला प्रोफेसर को पुणे से सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया और अपने साथ गहन पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई,
बॉटनी और जूलॉजी प्रश्न पत्र तक की पहुंच

नाम सामने आने के बाद पता चला है कि, महिला प्रोफेसर को बॉटनी और जूलॉजी जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न पत्रों का खुला एक्सेस दिया गया था,
मैडम जी ने, इसी का फायदा उठाकर भारी रकम में इन प्रश्न पत्रों को महाराष्ट्र के कई शहरों के अलावा राजस्थान तक पहुंचाया,
मीडिया की जांच में सामने आया है कि महिला प्रोफेसर पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में विज्ञान विभाग की प्रोफेसर हैं,
इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने अपने कुछ चुनिंदा छात्रों को इन प्रश्न पत्रों का एक्सेस भारी रकम में दे दिया, इसके बाद छात्रों ने भी इन प्रश्नपत्रों को अपनी सहूलियत के हिसाब से उच्च दामों में बेचा,
मास्टरमाइंड की पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने दो दिन पहले ही प्रहलाद विट्ठल राव कुलकर्णी जिसे पीबी कुलकर्णी के नाम से जाना जाता है, को गिरफ्तार कर लिया था,
प्रहलाद कुलकर्णी को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई में पेपर लीक का मास्टरमाइंड बताकर गहन पूछताछ की थी, इसके बाद धीरे-धीरे सबके नाम सामने आने लगे,
घर पर लगवाई पर्सनल नीट कोचिंग

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
मनीषा मांढरे से गहन पूछताछ के बाद यह बात सामने आई है कि, प्रोफेसर मनीषा ने अपनी सहयोगी मनीषा बाघमारे का इस काम को अंजाम देने के लिए सहयोग लिया,
मनीषा वाघमारे ने नीट परीक्षा के उम्मीदवारों को इकट्ठा किया और प्रोफेसर मनीषा मांढरे के घर विशेष कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई,
जहां पर उम्मीदवारों के सामने प्रश्न पत्र सार्वजनिक किए गए और उन्हें याद रखने और किताब में लिखने के लिए कहा गया,
जिसके चलते, लालच में आए छात्रों ने उन प्रश्न पत्रों को बेंच दिया, बाद में इन्हीं प्रश्न पत्रों को ‘गैस पेपर‘ कहकर सार्वजनिक किया गया,
