प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने भाषण के दौरान भारत के प्लान-बी की चर्चा की है,
मिडिल ईस्ट में इसराइल और ईरान के बीच हो रहे जबरदस्त युद्ध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत से भी जोड़ा है,
श्री मोदी ने संसद में अपने भाषण के दौरान कहा कि, मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध भारत के लिए भी एक बड़े चिंता की बात है,
मिडिल ईस्ट के युद्ध को कोरोना से जोड़ा
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को मोदी ने कोरोना काल से जोड़ते हुए आने वाली बड़ी चुनौतियों की बात कही है,
नरेंद्र मोदी ने कहा कि, यह युद्ध सिर्फ मिडल ईस्ट के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है,
क्योंकि यह विश्व की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल रहा है जिसके परिणाम भारत में भी देखने को मिल सकते हैं,
इसीलिए वर्तमान चुनौती कोरोना काल जैसी खतरनाक और असमंजस में डाल देने वाली हो सकती है,
उन्होंने कहा, भारत को चाहिए कि हम सभी एक साथ मिलकर अभी की इन चुनौतियों का सामना करना करें,
मिडिल ईस्ट के युद्ध का भारत पर असर
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध न सिर्फ व्यापक स्तर पर पहुंच गया है बल्कि इसने व्यापार को भी बाधित किया है,
आज यह युद्ध अपने 24वें दिन में प्रवेश कर गया है और फिलहाल अभी इसके रुकने की संभावना ना के बराबर है,
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से दुनिया के लगभग सभी देश तेल और गैस का आयात नहीं कर पा रहे हैं,
प्रधानमंत्री ने संसद में अपनी बात रखते हुए कहा कि, तेल और गैस का संकट ऐसे देश के लिए एक आपदा बन गया है,
जो देश खासकर अपनी विश्वसनीय क्षमताओं और आवश्यकताओं के लिए ऊर्जा पर निर्भर हैं,
उन्होंने स्पष्ट किया कि, इस युद्ध का असर निश्चित रूप से भारत पर पड़ेगा इसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए,
इसी को लेकर उन्होंने अपने प्लान-बी की भी संसद में चर्चा की, जिसके लिए देश को तैयार रहना होगा,
क्या है मोदी का प्लान-बी

मोदी ने बताया कि, जिस तरह देश में गैस और तेल की किल्लत पड़ी हुई है भारत लगातार अपनी उर्जा क्षमताओं को बढ़ा रहा है,
उन्होंने कुछ आंकड़े का जिक्र करते हुए बताया कि, भारत पहले 27 देश से एनर्जी आयात करता था,
लेकिन हमने विभिन्न देशों से संबंधों को सुधारते हुए यह आंकड़ा बढ़ाकर 41 कर दिया है,
उन्होंने बताया कि, किसी भी भारतीय को घबराने की जरूरत नहीं है, हमारे पास 53 लाख मैट्रिक टन रिजर्व तेल सुरक्षित है,
हमारा लक्ष्य 65 लाख मैट्रिक टन रिजर्व तेल को हासिल करना है जो बहुत ही जल्दी पूरा होगा,
साथ ही उन्होंने, समुद्र में फंसे सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षित देश वापसी की उम्मीद भी जताई है,
