SIR News: चुनाव आयोग को लेकर कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट में आयोग की तरफ से एक एफिडेविट दाखिल किया गया है।
जिसमें आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसले सर्वसम्मति से थे, जिनमें किसी तरह की कोई असहमति जैसी चीज सामने नहीं आई है।
दरअसल, सोमवार को एक रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसमें चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा।
एसआईआर से जुड़ी थी याचिका

राकेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति द्वारा दायर की गई रिट याचिका में कहा गया था कि, चुनाव आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से नहीं थे।
इसको संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त सहित कई अधिकारियों को नोटिस दादी किया था।
इसके बाद आज हुई सुनवाई में आयोग ने कोर्ट में अपना जवाब देते हुए बताया कि आयोग द्वारा दिए गए फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से ही लिए गए थे।
इसके साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि, तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी तरह के प्रशासनिक या कामकाजी मतभेद नहीं हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बनी आधार
राकेश कुमार सिंह की यह याचिका इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को आधार बनाकर दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी फैसलों में तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी।
यह रिपोर्ट 2 महीने पहले ही इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित की गई खोजी रिपोर्ट के विशेष अंक में छापी गई थी।
इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि, चुनाव आयोग के 14 फैसला ऐसे थे जिन पर मुख्य चुनाव आयुक्त के अतिरिक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह शंभू ने अपनी आपत्तियां जताई थी,
लेकिन आयोग ने इन आयुक्तों की आपत्तियां नहीं मानी और सभी फैसले चुनाव आयुक्तों के नाम पर जारी किए गए।
इन आरोपों को खारिज करते हुए आयोग ने कोर्ट में कहा कि, चुनाव आयोग द्वारा लिए गए तीन मुख्य फैसले 24 जून 2025 27 अक्टूबर 2025 और 14 भी 2026 को आयोग द्वारा दिए गए फैसले में तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति थी
ज़िरह के दौरान ऊप चुनाव आयुक्त कोर्ट में ही मौजूद थे, जिन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि आयोग द्वारा लिए गए सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए थे।
SIR में नहीं हुआ फॉर्म 6 में बदलाव

बहस के दौरान जब आयोग से यह पूछा गया कि उसने किसकी मंजूरी से फार्म 6 में बदलाव किए थे?
तो इसके जवाब में आयोग के वकीलों ने बताया कि फॉर्म 6 में कोई और किसी तरह के बदलाव नहीं किए गए हैं।
इसके साथ ही आयोग ने कोर्ट में याद दिलाया कि चुनाव आयोग की नियमावली 1960 के मुताबिक केंद्र सरकार के अलावा किसी भी फॉर्म में चुनाव आयोग कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
जब चुनाव आयोग से यह पूछा गया कि अगर फोर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है तो आप घोषणा पत्र किसके लिए मांग रहे हैं?
इसके जवाब मैं आयोग के वकीलों ने कहा कि कटे हुए नाम जोड़ने के लिए मांगा गया घोषणा पत्र एक अलग प्रक्रिया थी इसको फॉर्म 6 से जोड़ना सही नहीं है।
इसके साथ ही, आयोग ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से चुनाव आयोग में उपस्थित होने की कोई जरूरत नहीं है,
वे ऑनलाइन अथवा अपने बूथ लेवल एजेंट के जरिए घोषणा पत्र के साथ पुनः आवेदन कर सकते हैं।
