अपनी औलाद को सुधारो, सूर्या चौहान हत्याकांड पर और क्या बोले योगी

Surya Chauhan murder: सूर्या चौहान मर्डर केस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी बयान आ गया है।

उन्होंने सूर्या चौहान मर्डर केस पर दो टूक बोलते हुए कहा कि, चाकू की आड़ में दोस्ती संभव नहीं है और ऐसी दोस्ती नहीं हो सकती।

इसके साथ, उन्होंने यह भी कहा कि, जब धर्म की मांग हो तो शस्त्र भी उठाये जा सकते हैं।

उन्होंने गौवंश संरक्षण की बात करते हुए, यह भी कहा कि, गाय को सिर्फ पशु कहना ठीक नहीं है, गाय हमारी परंपरागत माता है।

विस्थापित हिंदुओं को दिया मालिकाना हक

दोस्ती की आड़ में छुरी नहीं चल सकती, योगी का बयान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को, प्रदेश के बिजनौर जिले में पाकिस्तान से आए विस्थापित हिंदुओं को संबोधित कर रहे थे।

इसके साथ ही उन्होंने, पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए हिंदू परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक भी सौंपा।

इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिकों को भी, उनकी जमीन के मालिकाना हक के प्रमाण पत्र सौंपे गए।

इससे, वहां मौजूद सभी लाभार्थियों के चेहरे खुशी और उत्साह से खिल गए इसके बाद उन सब ने मुख्यमंत्री का आभार बताया।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि, प्रदेश की सरकार हर सामान्य और राष्ट्रभक्त नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी है।

अपनी नालायक औलादे को सुधारो

जिस तरह दोस्ती की आड़ में सूर्या चौहान की चाकू मारकर हत्या की गई ऐसे परिवारों को मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ऐसे मां-बाप को चाहिए कि वे अपनी नालायक औलाद को समझा नहीं पा रहे हैं यह एक बड़ी गलती है।

उन्होंने कहा, अपने बच्चों को सामाजिक संस्कार देने चाहिए और उन्हें समाज में अच्छे लोगों से संबंध बनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

तुम धर्म की रक्षा करोगे तो धन तुम्हारी करेगा

सूर्या चौहान हत्याकांड पर भी बोले योगी आदित्यनाथ

उन्होंने महाभारत और रामायण का उदाहरण देते हुए कहा, जब खरदूषण जैसे राक्षस द्वंद मचाते हैं तो उन्हें सीधा करना ही पड़ता है।

ऐसे राक्षसों को धर्म के रास्ते पर लाने के लिए, अगर शस्त्र उठाने पड़ें, तो शस्त्र भी उठाने चाहिए, यह धर्म की मांग है।

गोवंश की रक्षा पर भी बोले योगी

उन्होंने गोवंश के मुद्दे पर विपक्ष की चुटकी लेते हुए कहा कि, कुछ लोग गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात करते हैं।

लेकिन यह ध्यान रखने वाली बात है कि वह गाय को एक पशु ही मानते हैं जबकि हमारे शास्त्रों में गाय को माता मनाने की परंपरा है।

हमारे मन में गाय के प्रति निष्ठा और सम्मान की भावना होनी चाहिए, इसके बाद दूसरी बातें करनी चाहिए जो बाद का विषय है।

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