आज दिनांक 19 मार्च है, 2026 में हिंदू सनातन धर्म के लिए आज से एक पवित्र उत्सव की शुरुआत हो रही है,
हम सब जानते हैं, इस पवित्र उत्सव का नाम नवरात्रि है जो मां दुर्गा के प्रति आस्था और सम्मान का प्रतीक है,
मां दुर्गा की भक्ति, आस्था और सम्मान में मनाया जाने वाला यह पर्व सिर्फ उपवास का पर्व ही नहीं बल्कि समृद्धि भी लाता है,
इस पर्व को को 9 दिनों तक धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है जिसका ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी है,
तो आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि, नवदुर्गा क्यों मनाए जाते हैं और इसकी शुरुआत कहां और कब से हुई,
ऐतिहासिक महत्व
चैत्र नवरात्रि न सिर्फ धार्मिक और पौराणिक महत्व का पर्व है बल्कि इसका विस्तृत और पुराना इतिहास भी है,
इस पर्व का उल्लेख कई प्राचीनतम पुराणों में मिलता है जो इसके ऐतिहासिक महत्व को बारीकी से बताता है,
मार्कण्डेय पुराण और देवी भागवत पुराण में इस पर्व का विवरण विस्तार से बताया गया है,
ये ग्रंथ 300 ई, से 600 ई, के बीच लिखे हुए माने जाते हैं, इन ग्रंथो में राजाओं द्वारा युद्ध से पहले ‘देवी पूजा‘ का विवरण मिलता है,
अर्थात हम कह सकते हैं कि, चैत्र नवरात्रि पर्व का ऐतिहासिक महत्व लगभग 1400 साल से 1800 साल पुराना है,
वैदिक काल और ऋतु परिवर्तन से संबंध

वैदिक समय में नवरात्रि को शक्ति पूजा के नाम से जाना जाता था,
उस समय मंत्रोच्चारणों द्वारा देवी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करने का एक तरीका शक्ति पूजा था,
ऐसा वसंत के आगमन के हर्ष के रूप में और प्रकृति के भविष्य की सुंदर कामना के लिए भी किया जाता था,
इस पर्व को राजाओं द्वारा इसलिए मनाया जाता था, क्योंकि उनका मानना था कि युद्ध से पहले देवी पूजा आवश्यक है,
और इससे भविष्य में होने वाले युद्ध में देवी का आशीर्वाद बना रहता है इसलिए राजा महाराजा भी नौ दिनों तक देवी आराधना करते थे,
पौराणिक मान्यता
इसका ऐतिहासिक से ज्यादा पौराणिक महत्व है इसीलिए नवरात्रि को धर्म से जोड़ा जाता है,
महिषासुर का वध
पौराणिक रूप से इसे मां दुर्गा द्वारा किए गए एक राक्षस के वध से जोड़ा जाता है, जो 9 दिनों तक चली लड़ाई के बाद दसवें दिन हुआ था,
दरअसल, महिषासुर ने भगवान ब्रह्मा से कठोर तपस्या करके देवताओं को पराजित करने का वरदान मांग लिया था,
जिसके कारण देवता भी महिषासुर को नहीं हरा पा रहे थे और उन्हें स्वयं अपनेआप को उससे बचाना पड़ रहा था,
इसलिए, सभी देवताओं द्वारा एकत्र की गई शक्ति से मां दुर्गा का रूप प्रकट हुआ,
जिनसे महिषासुर का 9 दिनों तक युद्ध चला किंतु दसवें दिन वह मां दुर्गा के हाथों मारा गया, तब देवताओं को सुकून मिला,
यानी कह सकते हैं, कि इस पर्व का सिर्फ धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व भी है।
