कढ़ाई कारखाने और बड़े कारोबार के लिए जाना जाने वाला सूरत अब मजदूरों के अधिकारों और इसके बाद शुरू हुए आंदोलन की चपेट में आ गया है।
16 अगस्त को जब अचानक कढ़ाई कारखाने में काम करने वाले हजारों मजदूरों ने सप्ताह में एक दिन छुट्टी को लेकर आंदोलन शुरू किया तो यह खबर न्यूज़ हैडलाइन की सुर्खियों का हिस्सा बन गई।
क्या थी मजदूरों की मांग

मीडिया समूह को दी जानकारी में कई मजदूरों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हमें यहां पर काम करने पर सैलरी तो अच्छी मिलती है।
लेकिन सप्ताह में एक दिन भी छुट्टी नहीं दी जाती है और छुट्टी मांगने पर दिन के हिसाब से सैलरी काटने की धमकी दी जाती है।
इसके साथ ही मजदूरों ने काम के घंटे कम करने की भी मांग करते हुए प्रदर्शन किया, और इसको लेकर लेबर कमिश्नर से अपनी शिकायत दर्ज कराई।
फिलहाल लेबर कमिश्नर और फैक्ट्री मालिकों के बीच संवाद चल रहा है।
24 तारीख को आएगा फैसला
16 अगस्त से शुरू हुए यह विरोध प्रदर्शन मजदूर संगठनों और फैक्टरी मालिकों की कई बार की वार्ताओं से गुजरे लेकिन नतीजा संतोषजनक नहीं आया।
सूरत के लेबर कमिश्नर से इस बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मालिकों से बात चल रही है और 24 तारीख को होने वाली बैठक में मजदूरों के पक्ष में इस पर फैसला आने की उम्मीद है।
लेबर कानून का असर
देश भर में लेबर कानून लागू है जिसमें न्यूनतम मजदूरी और ओवरटाइम में काम कराए जाने पर अतिरिक्त बोनस जैसे नियम शामिल है।
लेकिन असंगठित मजदूरों को इस बारे में जानकारी न होने के चलते ये नियम सही तरीके से लागू नहीं हो पाते हैं।
इस लेबर कानून में मजदूरों के हित में कई नियम बनाए गए हैं जैसे,
मजदूरों को अपनी यूनियन बनाने का अधिकार,
शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार और
काम करने वाले कारखाने में समुचित सुरक्षा व्यवस्था आदि।
लेबर कानून का इतिहास और बदलाव

भारत में पहले अलग-अलग क्षेत्र के लिए केंद्रीय स्तर पर 44 कानून थे जो फैक्ट्री के नियम और मजदूरों के अधिकार सुनिश्चित करते थे।
ये बहुत पुराने हो गए थे इसके बाद 2020 में भारत सरकार ने नये लेबर कानून लागू किया:
समान काम के साथ समान वेतन का अधिकार,
ट्रेड यूनियन से जुड़ी हड़तालें,
सोशल सिक्योरिटी कोड,
हेल्थ एंड वर्किंग सिक्योरिटी कोड।
फिलहाल किसान संगठनों और कुछ राज्यों के विरोध के चलते ये कानून भारत में अभी पूरी तरीके से सक्रिय नहीं हो सके हैं।
