पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का प्रमाण, पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश मंत्रालय ने और क्या कहा

Passport service day: 24 जून 1967 को लागू हुए पासपोर्ट अधिनियम की याद में पासवर्ड सेवा दिवस मनाया गया।

बुधवार यानी कल आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की प्रेस ब्रीफिंग की गई।

इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय ने अहम जानकारी देते हुए पासपोर्ट को भारतीय नागरिकता की पहचान से अलग बताया।

अब, नागरिकों के अंदर यह जानने की उत्सुकता और भी ज्यादा बढ़ गई है कि, भारतीय नागरिकता की पहचान का प्रमाण क्या है?

पासपोर्ट नहीं नागरिकता का प्रमाण

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का प्रमाण, विदेश मंत्रालय ने और क्या कहा

बुधवार को आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की मीडिया से सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।

जिसमें अधिकारियों ने कहा कि, भारत सरकार द्वारा पासपोर्ट जारी करने का उद्देश्य आपकी यात्रा को आसन बनाना है।

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि, पासपोर्ट आपकी भारतीय नागरिकता का प्रमाण है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों के तहत किसी भी देश का यात्री अगर दूसरे देश में जाता है तो उसके लिए वैध पासपोर्ट जरूरी है।

यदि किसी नागरिक के पास, वैध पासपोर्ट नहीं है तो उसके लिए किसी दूसरे देश की यात्रा करना असंभव या नामुमकिन होता है।

हर साल मनाया जाता है पासपोर्ट सेवा दिवस

हर साल 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस मनाया जाता है, क्योकि यह अधिनियम 24 जून 1967 को लागू हुआ था।

इसका उद्देश्य पासपोर्ट सेवा देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित और सम्मानित करना होता है।

हर साल पासपोर्ट सेवा दिवस मनाने का उद्देश्य भारतीय नागरिकों को फर्जी एजेंटों से सावधान और सुरक्षित करना भी होता है।

साथ ही, पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया को हर वर्ष सरल बनाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम के जरिए जनता को जागरूक करना है।

इस बार के इसी कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ किया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

क्यों लागू  हुआ था पासपोर्ट अधिनियम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत सरकार ने लागू किया था पासपोर्ट अधिनियम

दरअसल, सतपंथ सिंह नाम के एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालते हुए आम नागरिकों की विदेश यात्रा की बात कही।

उनका कहना था कि आम नागरिकों की यात्रा इतनी सरल बनाई जानी चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति विदेश जा सके।

जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने सही ठहराया और सतपंथ सिंह के हक में फैसला सुनाते हुए सरकार को अध्यादेश लाने का आदेश दिया।

इसके बाद सरकार ने इसकी प्रक्रिया मई महीने में तेजी से शुरू करते हुए जून तक इसे संसद से पारित करवा लिया।

और इसके साथ ही 24 जून को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के साथ ही यह पासपोर्ट सेवा अधिनियम 1967 बन गया।

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