पिछले कई दिनों से अमेरिकी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री भारत पर अलग-अलग तरह से बयान दे रहे थे जो असहज कर रहे थे।
इसके बाद, सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इन सब बातों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए भविष्य की रुपरेखा बताई।
इसको लेकर उन्होंने भारत की दूरदर्शिता याद दिलाई और बताया कि भारत 1000 साल के भविष्य का निर्माण कर रहा है।
उतावले फैसले नहीं लेता भारत
दरअसल, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रिपब्लिक शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जहां उन्होंने यह सब कहा।
उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया में चलने वाले युद्ध क्षणिक थे, जो भी देश इसमें कूदे उनकी अर्थव्यवस्था की अब कोई दिशा नहीं है।
लेकिन भारत की जनता का धैर्य बना रहा और अब जबकि पश्चिम एशिया युद्ध समाप्त हो चुका है तो उसके परिणाम हम देख रहे हैं।
उन्होंने कहा, मजबूरन ही सही इस युद्ध की आग में अरब देशों को भी झुलना पड़ा, इसके नकारात्मक परिणाम उन्हें झेलने पड़े।
विकास, निवास और विनाश देख चुका है भारत

रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में मोदी ने इस बात पर भी अपनी चुप्पी तोड़ी कि, पश्चिम एशिया युद्ध में भारत का पक्ष लचीला रहा।
इस पर उन्होंने कहा कि, हम वो भारतीय हैं, जिन्होंने युग बदलते देखे और हमने सभ्यताओं को भी विकसित होता देखा है।
इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न होने में 2000 साल लग गए, तब जाकर भारतीयों ने सुखद लोकतांत्रिक आजादी का आनंद लिया।
उन्होंने बिना नाम लिए याद दिलाया कि, अलग-अलग देश और क्षेत्र से आए आक्रांताओं ने भारत को बदलने की कोशिश की।
हालांकि कुछ समय के लिए जरूर भारतीय विभाजित हो गए, लेकिन भारतीयों की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।
उन्होंने कहा, आदिकाल से आधुनिककाल तक भारत की सोच संपूर्ण विश्व को जोड़ने वाली रही है ना कि तोड़ने वाली।
इसके बावजूद भी, मध्यकाल में भारतीयों को युद्ध और विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा जो देश के विकास में बाधा बना।
नेशन फर्स्ट की नीति को दुनिया ने माना
मोदी ने आगे हाल ही में संपन्न हुई G7 शिखर सम्मेलन की बैठक का जिक्र करते हुए उनके नेताओं की प्रतिक्रियाएं बताईं।
मोदी ने कहा कि, सात विकसित देशों के समूह ‘ग्रुप ऑफ़ 7‘ के सदस्यों ने भी भारत की ‘राष्ट्र प्रथम’ नीति को स्वीकार किया।
मोदी ने कहा कि, मैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का शासन चला रहा हूं, जिसके नागरिक या मूल निवासी पूरे विश्व में है।
हम कोई भी जल्दबाजी बाला उतावला फैसला नहीं ले सकते, जिससे विदेश में रहने वाले भारतीयों को खतरा महसूस हो।
उन्होंने कहा, हम कोई भी जल्दबाजी वाला कदम उठाकर विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के भविष्य के साथ नहीं खेल सकते।
