तृणमूल कांग्रेस: बंगाल चुनाव हारने के बाद अपने ही विधायकों और सांसदों का भरोसा खोई ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने अपनी पार्टी-लाइन से अलग होकर एनडीए के साथ जाने की इच्छा जताई है।
यह ममता बनर्जी के साथ उस समय हो रहा है जब भरोसेमंद विधायक, मेयर और सांसद लगातार उनका साथ छोड़ कर जा रहे हैं।
कुछ दिन पहले ही टीएमसी के ही एक राज्यसभा सांसद शुखेंदु रोय ने अपनी ही पार्टी से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया था।
सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी

समाचार एजेंसी PTI ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया X हैंडल पर देते हुए काकोली दस्तीदार के हवाले से यह कहा है।
पीटीआई के मुताबिक, दस्तीदार ने अपने और टीएमसी के बीस सांसदों के हस्ताक्षर सहित एक चिट्ठी ओम बिडला को सौंपी है।
जिसमें उन्होंने, अपने सहित 20 तृणमूल सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने के लिए सीट की इच्छा जताई है।
उन्होंने यह भी कहा कि, ये सांसद लोकसभा में भाजपा की एनडीए को समर्थन देना चाहते हैं जिसके लिए स्पीकर से कहा है।
ममता के विरोध में 19 के मुकाबले 20 सांसद
मालूम हो कि, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद हैं, जो 2024 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में जीतकर आए थे।
इसीलिए सांसदों को यह कदम उठाने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए होगा, अन्यथा दल-बदल कानून लागू हो सकता है।
जिस तरह पार्टी के 28 में से 20 सांसदों ने अचानक बगावत की है, इससे समझ आता है कि यह प्लानिंग पहले से ही चल रही थी।
बगावत करने वाले सांसदों में, काकोली दस्तीदार के अलावा शर्मिला सरकार और शताब्दी रोय जैसे वरिष्ठ नाम शामिल है।
विधायक पहले ही दे चुके हैं धोखा

2026 में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पहली बार स्पष्ट और बड़े बहुमत के साथ सरकार में आई है।
इसके बाद विधायकों ने हार का ठीकरा ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी पर थोपते ते हुए बगावत कर दी।
और फिर पार्टी के जीते हुए 89 में से 58 सांसदों ने बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को खुद को असली टीएमसी होने का दावा किया।
इसके बाद विधानसभा स्पीकर रथीनेंद्र बॉस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष मानते हुए उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
पता हो कि, चार दिन पहले ही राज्यसभा के टीएमसी सांसद सुखेंदु रोय ने अपनी ही पार्टी पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए थे।
उन्होंने पार्टी में अनुशासन की कमी को उजागर करते हुए अपने पद से इस्तीफा देते हुए सांसदों के बगावत की शुरुआत की थी।
