आज सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर चंदा चोरी मामले की सुनवाई चल रही थी जिसमें कोर्ट ने नई एसआईटी से जवाब मांगा है।
इस पर, प्रतिवादी की ओर से पेश हुए वकील ने जांच में पारदर्शिता की बात कही और रिपोर्ट जल्दी दाखिल करने को कहा।
इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, पारदर्शिता पर पूरा ध्यान दिया जाएगा, लेकिन पहले SIT की रिपोर्ट आने दीजिए।
सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नवगठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम SIT रिपोर्ट की समीक्षा की आख्या मांगी।
सीबीआई से जांच की मांग

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें कहा गया था कि एसआईटी की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, अगली सुनवाई तक हम एसआईटी को अपनी रिपोर्ट की स्थिति प्रस्तुत करने का आदेश देते हैं।
अगली सुनवाई के बाद एसआईटी की रिपोर्ट की स्थिति के आधार पर अदालत अपना रूख स्पष्ट करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ चंदा चोरी की शिकायत के सामूहिक यशिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष

प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने पुनर्गठित एसआईटी की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि, जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है।
जिसकी अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक किरण एस कर रही हैं, जबकि एक उपमहानिरीक्षक और एक पुलिस अधीक्षक भी हैं।
कानूनी मामलों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता देवदत्त कामत ने रखा।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि, श्रद्धालुओं द्वारा ₹100 से ₹500 तक (अपनी श्रद्धा के अनुसार) चंदा दिया गया था।
लेकिन उसकी बड़े पैमाने पर हेरा फेरी हुई, और वास्तविक रूप में वह मंदिर ट्रस्ट तक पहुंच ही नहीं पाया।
क्योंकि श्रद्धा के लिए पूरे देश के कोने-कोने से चंदा आया था लेकिन कितना चंदा किसने दिया इसका ना कोई रिकॉर्ड है और ना ही रसीद।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चंदे की उन्हें कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई।
