सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने जब भारत के युवाओं को कॉकरोच कहकर संबोधित किया था,
तब मोदी सरकार ने ये नहीं सोचा होगा कि, उनका यह शब्द हमारा वो भ्रम तोड़ देगा जिसमें, भाजपा द्वारा यह कहा जाता था कि ‘हमारी पार्टी में स्तीफे नहीं होते। ‘
और इसके बाद जब 6 जून को जंतर मंतर पर पहली बार कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में भीड़ जमा हुई, फिर भी मोदी सरकार को लगा कि यह भीड़ आम भीड़ ही होगी जिसको हम आसानी से नियंत्रण में कर सकते हैं।
क्योंकि दिल्ली के जंतर मंतर के मैदान में आंदोलन होना कोई नई बात नहीं है, इसके अलावा कहीं भी भीड़ जमा होने से पहले ही उसे दवा देना बीजेपी की नीति रही है।
लेकिन यह मामला इतना तूल पकड़ जाएगा इसकी कल्पना तो शायद विपक्ष ने भी नहीं की थी।
हमारी पार्टी में स्तीफे नहीं होते 
दरअसल, 2015 में जब देश के तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पूछा गया था कि ललित मोदी के मामले में आपकी पार्टी और सरकार पर दबाव है क्या आपकी पार्टी के जिम्मेदार नेता इस्तीफा देंगे?
विपक्ष ने इस मामले में तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस्तीफा मांगा था।
उनसे यह इस्तीफा ललित मोदी को ब्रिटेन पहुंचने में मदद करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा मांगा था।
इसी का जवाब देते हुए तत्कालीन गृहमंत्री ने कहा था कि, ‘यह एनडीए है यूपीए नहीं, और इसीलिए हमारी एनडीए में स्तीफे नहीं होते।’
राज्य मंत्री ने दिया था इस्तीफा
बीजेपी की यह बात 17 अक्टूबर 2018 तक तो सही रही जब तक तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने महिला पत्रकारों से यौन उत्पीड़न के आरोप में इस्तीफा नहीं दे दिया।
लेकिन, क्योंकि यह मामला सिर्फ एक विशेष क्षेत्र तक सीमित था और यह कोई जन आंदोलन भी नहीं था, इसके अलावा उनका स्वभाव भी लचीला था, जिसके चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
लेकिन, कैसे भी करके बीजेपी इस घटना को जनसाधारण की यादों से भुला देने में कामयाब भी रही।
दे ही दिया प्रधान ने इस्तीफा

किंतु कॉकरोच जनता पार्टी, आम युवा नागरिक और छात्रों ने, भारतीय जनता पार्टी के उस भ्रम को तोड़ दिया जिसको मन में बिठाकर वे जनता के सामने 12 साल से गर्व से बोलते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इंस्टाग्राम के जरिए ‘नमस्कार मित्रों’ की बजाय ‘फ्रेंड्स’ तक आ गए, यह सोचकर कि इससे वे जनता के दिल में अपना अपनापन घोल पाएंगे।
लेकिन, इससे विपक्ष और सीजेपी ने विरोध और तेज कर दिया जिसके कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा।
