UPI: लगातार 2 दिन से यह चर्चा हो रही है कि नया यूपीआई नियम आने से ₹2000 से ऊपर का पेमेंट करने पर चार्ज लगेगा।
इसको लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरते हुए इस नियम को मोदी सरकार द्वारा जनता से वसूली करने का एक नया तरीका बताया।
सवाल यह है कि, क्या वास्तव में इस नए पेमेंट सिस्टम में बदलाव करने का उद्देश्य आम जनता की जेब कमजोर करना है?
क्योंकि यह मामला विपक्ष ने ज़ोर-औ-शोर से उठाया इसलिए जनता के मन में भी शक होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर ध्यान से देखा जाए तो उसकी सच्चाई कुछ और ही है।
नए नियम में क्या कहा गया है

यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम यानी यूपीआई के लिए नियम बनाने का काम नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया करता है, जिसने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि, सरकार द्वारा लाए गए इस नियम का असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
इसका असर कैसे दिखेगा, इस बारे में जानकारी एनपीसीआई ने विस्तार से देते हुए आम जनता की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है।
1. यदि एक सामान्य व्यक्ति दूसरे सामान्य व्यक्ति को रुपए ट्रांसफर करता है चाहे फिर उसकी सीमा ₹2000 या उससे ऊपर ही क्यों ना हो इस पर कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा।
2. पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट अगर ₹2000 या उससे ऊपर का लेनदेन करते हैं, तो फिर भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
इसका उद्देश्य खुदरा और छोटे व्यापारियों को डिजिटल क्षेत्र से जोड़ना है।
3. लेकिन यदि कोई सामान्य ग्राहक स्पेसिफाइड मर्चेंट जैसे- टेलीकॉम कंपनियां, रेलवे, पेट्रोल अथवा ईंधन, के अतिरिक्त आदि बड़े मर्चेंट पेमेंट सिस्टम पर भुगतान करने पर ₹2000 से अधिक की पेमेंट पर ₹5 का डिडक्शन चार्ज देना होगा।
लेकिन यहां पर यह समझना बहुत जरूरी है कि, यह चार्ज ग्राहक को नहीं बल्कि स्पेसिफाइड मर्चेंट संस्था अथवा कंपनी को देना होगा, यानी ग्राहक अब भी पूरी तरह सुरक्षित है।
4. सभी व्यापारियों के लिए चाहें वे संगठित बड़ी कंपनियां अथवा उद्योगों या असंगठित क्षेत्र के छोटे व्यापारी हों, ₹2000 तक के पेमेंट पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।
अगर ध्यान से देखा जाए तो, क्योंकि इस नियम से आम नागरिकों पर कोई असर नहीं पड़ा है इसीलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह नियम अभी क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से भुगतान करने के मामले में आम नागरिकों पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ता है।
क्या है एमडीआर?

अगर आप बारीकी से समझे तो सरकार जो नियम लाई है उसे एमडीआर कहा गया है जिसका मतलब है, मर्चेंट डिस्काउंट रेट।
सरकार ने अगस्त में ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर भविष्य में यूपीआई को लेकर कोई बदलाव होते हैं तो, इसका असर आम नागरिकों के लेनदेन पर किसी भी तरह से नहीं पड़ेगा, और हाल ही में आए इस नियम में यह बात स्पष्ट की गई है।
फिर भ्रम क्यों हो रहा है?
जब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन आफ इंडिया ने यह जानकारी दी थी कि पर्सन-टू-मर्चेंट द्वारा किए जाने वाले ₹2000 से अधिक के पेमेंट पर चार्ज लगेगा, इस अफवाह को विपक्ष ने भी हवा देना शुरू कर दिया।
यही कारण था कि, आम जनता इससे भयभीत हो गई और इस नियम को अपनी जेब खर्ची समझने लगी।
