22 मार्च का इतिहास (22 March ka itihaas)

आज दिनांक 22 मार्च है तो चलिए जानते हैं 22 मार्च के इतिहास में कौन-कौन-सी प्रमुख घटनाएं हुईं,

नादिर शाह ने कत्लेआम का आदेश दिया 1739

ईरान से आए बादशाह नादिर शाह ने दिल्ली में जबरदस्त नरसंहार का आदेश आज ही के दिन दिया था,

जब नादिर शाह के सिपाही दिल्ली में लूटपाट कर रहे थे तो दिल्ली की जनता ने इसका जोरदार विरोध कर दिया,

इस विरोध को दबाने के लिए नादिर शाह ने सरेआम नरसंहार का आदेश दे दिया था जिसे कतलेआम कहा गया,

उस समय दिल्ली की गाड़ी पर मोहम्मद शाह रंगीला शासन कर रहा था और नादिर शाह से हुई लड़ाई में वह हार गया,

इस लड़ाई को करनाल के युद्ध  के नाम से जाना जाता है,

रामचंद्र चटर्जी पैराशूट से उतरे 1890

कोलकाता के रामचंद्र चटर्जी पैराशूट से उतरने वाले पहले भारतीय बने थे,

इन्होंने गर्म गुब्बारे के पैराशूट से 10 अप्रैल 1889 को उड़ान भरी थी, और 22 मार्च 1890 को ऐतिहासिक छलांग लगाई,

वे द ग्रेट बंगोल नाम की कंपनी के साथ जुड़े थे जहां उन्होंने कई साहसी काम किये,

वे न सिर्फ एक कलाकार थे बल्कि पहले भारतीय एयरोनॉट भी थे, जिन्होंने यह गौरव हासिल किया,

22 मार्च का इतिहास (22 March ka itihaas)

लॉर्ड माउंटबेटन आखिरी वायसराय बनकर आए 1947

उनका कार्य मुख्य रूप से भारत विभाजन की कार्य प्रणाली को संचालित करना था जिसके लिए उन्हें भारत भेजा गया था,

उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता नेहरू और पटेल तथा मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना के साथ विचार-विमर्श कर सहमति बनाई,

लॉर्ड माउंटबेटन की अध्यक्षता में ही तीन जून योजना तैयार की गई थी जिसे दोनों पक्षों ने स्वीकार किया था,

परिणाम स्वरूप उन्हें आजाद भारत का पहला गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश सरकार द्वारा नाइट ऑफ गार्डर की उपाधि दी गई,

पहली विंटेज कार रैली का आयोजन 1964

इस रैली का आयोजन द स्टेट्समैन  समाचार पत्र द्वारा कोलकाता में किया गया था,

जिसका उद्देश्य गाड़ियों की विरासत को संभाले रखना और उनके मालिकों को सम्मानित करना होता है,

इसमें मुख्य तरह से दो प्रकार की गाड़ियां होती हैं विंटेज (1919-1930) और क्लासिक 1931-1975),

इंदिरा गांधी ने इस्तीफा दिया 1977

आपातकाल के बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस की जबरदस्त हार हुई थी इसके बाद इंदिरा गांधी ने अपना इस्तीफा दे दिया,

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी अपनी रायबरेली (सुरक्षित सीट) तक नहीं बचा पाई थीं इस चुनाव में,

उन्होंने अपना यह इस्तीफा तत्कालीन राष्ट्रपति बी, डी. जत्ती को सौंपा था,

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