Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय क्या कर रहे हैं और क्या नहीं यह शायद उनको भी नहीं पता।
क्योंकि जहां एक तरफ अमेरिका में सीएनएन न्यूज़ एजेंसी के व्हाइट हाउस में प्रतिबंध पर ट्रंप के खिलाफ गुस्सा भरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति किसी भी कीमत पर अपनेआपको कमजोर होता हुआ साबित नहीं होने देना चाहते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की स्पीच में उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, कि किसी भी कीमत पर ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए जिससे वह दूसरे देशों को परेशान कर सके, जबकि दूसरी तरफ उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क के साथ बाद में समझौता भी किया।
51 साल पुराना है खतरा ईरान

इसके बाद उन्होंने कहा, ईरान के पास किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं होने चाहिए और हम पूरी दुनिया से वादा करते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।
उन्होंने आने वाले नवंबर में अमेरिकी मिड टर्म चुनाव तक ईरान के साथ बड़ा समझौता करने की उम्मीद जताई है, हालांकि याद दिला दे, ईरान और अमेरिका का समझौता हर दो-तीन महीने में हो जाता है लेकिन कोई भी समझौता एक हफ्ते से ज्यादा नहीं चलता।
अंतरराष्ट्रीय अपराध संस्था अमेरिका के लिए खतरा
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ICC और इंटरपोल को आड़े हाथ लेते हुए अमेरिका ने इन संस्थाओं को बेलगाम बताते हुए ऐसे संगठनों को अमेरिका की संप्रभुता पर हमला बताया।
दरअसल, 2 महीना पहले अमेरिका द्वारा ईरान के एक स्कूल पर हमला किया गया था जिसमें दो सौ के आसपास बच्चे मारे गए थे, अमेरिका ने इन आरोपों से खुद को अलग कर लिया था जबकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने इसकी जांच करवाई थी।
इसे अमेरिका द्वारा किया गया गंभीर युद्ध अपराध बताया, जिस पर संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए ट्रंप ने, ऐसी संस्थाओं के खिलाफ कड़ा रूख अपनाने की बात कही।
डेनमार्क के साथ बड़ा समझौता

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ने डेनमार्क के साथ ग्रीनलैंड को लेकर समझौता किया है।
अमेरिका यह समझौता पिछले 1 साल से करना चाह रहा है लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड इसे ग्रैंनलैंड की संप्रभुता पर हमला बता रहे थे, इसके बाद ट्रंप द्वारा दी गई कई बार की धमकियां जबरदस्त काम आईं और इसके दम पर अमेरिका इस समझौते तक आसानी से पहुंच गया।
ग्रीनलैंड समझौते के दौरान दिए गए भाषण में उन्होंने कहा, यह समझौता अमेरिका और डेनमार्क को लंबे समय तक संबंध बनाए रखने में बहुत कारगर रहेगा।
समझौते के दौरान ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि, ग्रीनलैंड हमारे पास आने के बाद वहां दो बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे बनाए जाएंगे।
मीडिया प्रतिबंध से घिरे ट्रंप
मालूम हो, कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति ने सीएनएन और पॉलीटिको सहित तीन मीडिया पत्रकारों के व्हाइट हाउस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था, ट्रंप की दलील थी कि, ये संस्थान स्वतंत्रता का दावा करते हुए भी स्वतंत्र नहीं है और फेक न्यूज़ फैला रहे हैं।
जबकि तीनों मीडिया संस्थानों ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हुए प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
इसके बाद, व्हाइट हाउस को मुख्य रूप से कबर करने वाली मीडिया संस्था प्रेसपूल ग्रुप ने सीएनएन के समर्थन में उतरते हुए व्हाइट हाउस से दूरी बनाकर ट्रंप को बड़ा झटका दिया है।
यह ग्रुप ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस से लेकर विदेश यात्राओं तक हर जगह मौजूद रहता है।
